उत्तर प्रदेश

प्रकृति पूजन कर प्लास्टिक उपयोग के बहिष्कार का संकल्प

प्रकृति पूजन कर प्लास्टिक उपयोग के बहिष्कार का संकल्प
भदोही। पर्यावरण संरक्षण गतिविधि जिला इकाई द्वारा शनिवार को प्रकृति वंदन का कार्यक्रम अंबावरनाथ मंदिर बडागांव, पांडव कालीन बाबा पांडवानाथ मंदिर कौलापुर में राकेश कुमार पर्यावरण संयोजक द्वारा आयोजित किया गया। आचार्य दीपेन्द्र नारायण द्वारा मातृशक्ति से विधि पूर्वक शृष्टि निर्माता शिवशक्ति पूजन, गाय, नीम, पीपल, तुलसी घाट, सरोवर आदि पूजन कराते हुए प्रकृति वंदन संपन्न कराया गया। आचार्य द्वारा वृक्ष पूजन, जल पूजन, गाय पूजन का महत्व एवं विधि बताई गई। राकेश कुमार ने शृष्टि निर्माता आदि शिव शक्ति द्वारा निराकार स्वरूप शृष्टि से साकार स्वरूप शृष्टि की संरचना करने के पूर्व प्रकृति अर्थात पर्यावरण की संरचना की। क्योंकि प्रकृति अर्थात पर्यावरण के बिना जीवन संभव नहीं है अतःहमारे सनातन धर्म में आदि काल से हम सभी प्रकृति की पूजा करते चले आये हैं। क्षिति, जल, पावक, गगन, समीरा यह सभी प्रकृति ही हैं। पेड़ व पानी बिना जीवन संभव नहीं है। माता पृथ्वी ही मात्र पर्यावरण अनुकूल है तभी जीवन संभव है। अतःहम सभी पृथ्वी को माता व स्वर्ग से भी सुन्दर मानने वाले लोग, पशु, पक्षी, जानवर, सर्प, पेड़, नदी, तालाब आदि करोड़ों रूपों मे भगवान स्वरूप प्रकृति का वंदन-अभिनंदन करने वाले हैं। पर्यावरण की पूजा करने वाले उनका रक्षण, संरक्षण करने वाले सनातनी लोग हैं हम सभी को पर्यावरण के अनुकूल वातावरण में रहते हुए प्रकृति का रक्षण करना चाहिए। पेड़ व पानी ऊर्जा आदि को बचाना चाहिए। हमारे व प्रकृति का सबसे बड़ा शत्रु प्लास्टिक है जिसका बहिस्कार कर उसकी जगह अन्य विकल्प प्रयोग में लाना चाहिए। हमारे देश में सभी आदि महापुरुषों द्वारा पर्यावरण की रक्षा की गई है उनका संरक्षण किया गया है उनका रोपण किया गया है उनको बचाने के लिए हमारे बहुत से वीर पुरुषों एवं मातृ शक्तियों ने अपना बलिदान किया है पर्यावरण की रक्षा के लिए जोधपुर में माता अमृता ने अपने 363 कुटुंब के साथ खेजड़ी वृक्ष की रक्षा के लिए वृक्ष से लिपट गई जिन्हें जोधपुर के राजा के सैनिकों द्वारा वृक्ष काटते समय उनको भी बलिदान दिया था। अतःप्रकृति वंदन के अवसर पर हम सभी अपनी श्रद्धा सुमन ऐसे मातृशक्ति को समर्पित करते हुए पर्यावरण के रक्षकों को नमन करते हुए प्रकाश डाला। आचार्य दीपेन्द्र ने कहा कि प्रेरणा लेते हुए हम सभी अपने प्रकृति की रक्षा के लिए संकल्प लें कि हम पेड़ व पानी का संरक्षण करें व प्लास्टिक का बहिष्कार करेंगे। प्लास्टिक जो कि हमारे और हमारी प्रकृति के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है। हम प्लास्टिक का ज्यादा से ज्यादा विरोध करेंगे उसका बहिष्कार करेंगे हम सभी बाजार में सामग्री लेने जाने के लिए अपने घर से कपड़े का थैला लेकर जाएंगे उसमें बाजार का सामान खरीदेंगे। शादी विवाह या पर्वों पर प्लास्टिक निर्मित चीजों का उपयोग न करते हुए प्रकृति निर्मित पत्तल, मिट्टी इत्यादि के पात्र या कागज से निर्मित पात्र का प्रयोग करेंगे। इस प्रकृति वंदन में अभयानंद, मोहित मिश्रा, हर्ष, शिव प्रकाश चतुर्वेदी, उमाशंकर पुजारी, प्रभाकर तिवारी, बबलू मिश्रा आदि सहित काफी संख्या में माताएं उपस्थित रहीं।

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