अमेरिका के भारी-भरकम टैरिफ से कालीन परिक्षेत्र में बढ़ी बेरोजगारी की विभीषिका
भदोही। चीन व तुर्की के मशीन मेड सस्ते गलीचों से भारतीय कालीनों को मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच अमेरिका के टैरिफ वार से भारतीय उद्योग जगत में हड़कंप मचा है। भारतीय कालीनों के कुल निर्यात का अकेले 60 फीसद से अधिक आयात करने वाले अमेरिका के भारी-भरकम टैरिफ का असर अब उद्योग पर दिखाई पड़ने लगा है। कालीन प्रतिष्ठानों में हो रही बुनकर मजदूरों की छंटनी से बेरोजगारी बढ़ी है।
कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (सीईपीसी) के प्रशासनिक समिति सदस्य असलम महबूब ने आज यहां यूनीवार्ता को बताया कि रूस- यूक्रेन की जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए 50 फीसद अतिरिक्त टैरिफ से उबर पाना कालीन निर्यातकों के लिए टेढ़ी खीर बन गई है। अमेरिका द्वारा लगाया गया 25 फीसद अतिरिक्त टैरिफ लागू हो गया है, जबकि शेष 25 फीसद टैरिफ 27 अगस्त से लागू हो जाएगा। अमेरिका के टैरिफ वार से कालीन उद्योग पर काफी बोझ बढ़ने की आशंका बढ़ गई है।
उन्होंने बताया कि भारतीय हैंडनाटेड(हस्त निर्मित) कालीनों के उत्पादन से लेकर निर्यात तक का पूरा काम कुशल बुनकर मजदूरों द्वारा हाथ से किया जाता है। जिससे कालीनों की रंगाई, धुलाई, फीनिशिंग सहित अन्य छोटे बड़े कार्यों को पूरा करने में पूरे कालीन के कास्ट का 55-60 फीसद खर्च मजदूरी में चला जाता है। इसके उलट चीन व तुर्की जैसे कुछ देश मशीन मेड सस्ते कालीन तैयार कर रहे हैं। इन कालीनों का उत्पादन कास्ट कम होने से भारतीय हैंडमेड कालीनों को विश्व बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है। इन परिस्थितियों में पहले से ही जबरदस्त प्रतिस्पर्धा झेल रहे भारतीय कालीन उद्योग जगत के लिए अमेरिका के 50% अतिरिक्त टैरिफ से हालात काफी खराब होने के कयास लगाए जा रहे हैं।
श्री महबूब ने बताया कि विश्व बाजार में होने वाले भारतीय कालीनों के सकल निर्यात का लगभग 60 फीसद अकेले अमेरिका को होता है। यूएस द्वारा भारत पर थोपे जा रहे अतिरिक्त टैरिफ से अमेरिकी बाजार में भारतीय कालीन की कीमत बढ़ने से विपरीत असर पड़ने की आशंकाओं के बीच निर्यातक काफी परेशान हैं लोगों का मानना है कि ऐसे ही हालात बने रहे तो भारतीय कालीन का कारोबार पूरी तरह चौपट होने की आशंका बढ़ गई है। कालीन कारोबार में एक आंकड़े के अनुसार लगभग 13.5 लाख लोगों का श्रम निहित है। इन परिस्थितियों में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी की विभीषिका उत्पन्न हो सकती है। सूत्रों की मानें तो कालीन के कारोबारी अभी से मजदूरों की छंटनी शुरू कर दिए हैं। काम छूटने से मजदूर इधर-उधर भटकने को मजबूर हो गए







